These 8 foods can become poisonous if heated repeatedly! खाद्य पदार्थ

दोस्तों हर किसी को गरमा गर्म खाना पसंद होता है। खाने के स्वाद का आनंद लेने के लिए हम कभी – कभार बचे हुए खाने को दोबारा गर्म करके भी खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिन खाद्य पदार्थों का दैनिक जीवन में सेवन करते हैं उनमें से कुछ खाद्य पदार्थ बार-बार गर्म करने से बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं, जिससे आपके शरीर पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है, यह पदार्थ इतना हानिकारक हो सकते हैं कि यह जहर के समान भी कार्य कर सकते हैं।

आज हम आपको बताते हैं की कौन-कौन से खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिन्हें बार-बार गर्म नहीं करना चाहिए।

1. पालक (Spinach)

पालक (Spinach) की सब्जी को बार-बार या अधिक गर्म करने से इसका स्वास्थ्य पर बहुत खतरनाक प्रभाव पड़ सकता है। पालक की सब्जी जब तक ये नेचुरल फॉर्म में होते है काफी पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक होती है, इस तरह की सब्जियों को बार बार गरम करते है तो कहानी थोड़ी सी बदल जाती है। जब हम पालक को री-हिट करते है स्पेसली (Spatially) मल्टीपल (Multiple) गर्म करते हैं तो इनके अंदर मौजूद नाइट्रेट्स (Nitrates), नाइट्राइट (Nitrites) में ट्रांसफर (Transfer) हो सकते है। और आगे चलकर यह नाइट्रोसोमाइन्स (Nitrosamines) में भी तब्दील हो सकते हैं जो की एक कार्सिनोवेनिक (Carcinogenic) कंपाउंड (Compound) है, जो की बॉडी (Body) के अंदर कैंसर (Cancer) को बढ़ावा देता है

साइंटिफिक रिसर्च (Scientific Research) ने भी यह बात मानी है कि ये जो नाइट्रेट्स (Nitrates) है, इस तरह से ट्रांसफर (Transfer) होते है तो सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेय (Harmful) होते है। तो हमारी सलाह यही है की आप पालक को या पालक से बने व्यंजन को फ्रेश (Fresh) ही खाए और अगर यह बच जाए तो एक बार तो आप इसे गरम कर सकते है, लेकिन मल्टीपल टाइम (Multiple Times) इसे गरम करके खाने से बचना चाहिए और मंदी आंच पे थोड़ा ही गर्म करना चाहिए, तेज़ आंच पर और बहुत लम्बे समय तक इसे गर्म नहीं करना चाहिए।

2. चावल (Rice)

चावल (Rice) तो हम सबको पसंद बहुत पसंदीदा है लेकिन क्या आपको पता है चावल पकाते समय तो इसमें एक छोटा सा एक बैक्टीरिया (Bacteria) छुपा रहता है, जिसका नाम होता है बेसिलस सीरियस (Bacillus Cereus) यह बैक्टीरिया (Bacteria) जो होता है नॉर्मली (Normally) हमारी बॉडी (Body) के लिए हानिरहित (Harmless) होता है, लेकिन चावल को ठीक से स्टोर नहीं किया गया तो यह बैक्टीरिया (Bacteria) मल्टिप्लाई (Multiplying) करने लग जाते हैं और बैक्टीरिया (Bacteria) रिहीटिंग (Reheating) के बाद भी सर्वाइव (Survive) कर सकता है जो की फूड पोइज़निंग (Food Poisoning) का कारण बनता है।

सोचिये की आपने रात को चावल बनाए है और मज़े से खाए है और सोचा की बचे हुए चावल हो वो सुबह गरम कर के खाएंगे। लेकिन रात भर चावल को ऐसे हो छोड़ देने से आपने अनजाने में अपनी हेल्थ (Health) को रिस्क (Risk) में डाल दिया है तो इसका समाधान यह है की आप चावल को दुबारा से उपयोग (Use) करना चाहते है तो उसेको ठंडा करके तुरंत फ्रिज (Fridge) में रख दीजिये ताकि जो भी बैक्टीरिया (Bacteria) है वो बढ़ (Grow) ना हो सके। कोशिश यही कीजिये की चावल को बस एक ही बार गरम करके खा ले। या फिर चावल इतने ही बनाए जितने आप एक बार में ही खा सके।

3. आलू (Potato)

आलू हर घर में बनाने वाली सबसे कॉमन सब्जी है, आलू से कई प्रकार के व्यंजन बनाते हैं लेकिन कई बार हम आलू को उसकी सब्जी बनाने के कुछ घंटे पहले या सुबह के समय सब्जी बनाने के लिए उसे रात को ही उबालकर फ्रिज (Fridge) में रख देते हैं। लेकिन दोस्तों आपको बता दे की आलू को पहले से उबालकर नहीं रखना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से उसमें मौजूद पोषक तत्व (Nutrients) विषैले पदार्थों (Toxic Substances) में बदल जाते हैं। आपने भी देखा होगा कि उबले हुए आलुओं का स्वाद कुछ घंटो बाद बदल जाता है।

क्या आपको पता है जब हम आलू को पकाते है और रूम टेम्प्रेचर (Room Temperature) में छोड़ देते है। तो आलू में एक साइलेंट एनीमी (silent enemy) जिसका नाम होता है Clostridium Botulinum ये एक्शन (Action) में आ जाता है। यह एक बैक्टीरिया (Bacteria) होता है जो साइंटिफिक स्टडीज (scientific studies) के अकॉर्डिंग (according) हमारे अंदर बोटुलिस्म botulism का कारण बन सकता है। बोटुलिस्म एक तरह की फूड पोइज़निंग (Food Poisoning) है। जो की बहुत सीरियस (Serious) होती है और जिसमे इन्सान (Person) को लकवा (Paralysis) आ जाता है। और कुछ कंडीशन (Conditions) में तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

तो आप आलू पकाते हैं तो कोशिश करें कि आलू को री -हिट (Re-heat) बार-बार ना किया जाए या फिर फ्रिज (Refrigerator) में ही स्टोर करें ताकि बैक्टीरिया (Bacteria) की ग्रोथ (Growth) ना हो और हम आलू में उत्पन्न होने वाले जहर से बच सके इसीलिए बताया जाता है कि आलू की सब्जी या आलू से बने कोई भी व्यंजन को बार-बार री -हिट (Re-heat) नहीं करना चाहिए।

4. चिकन (Chicken)

चिकन (Chicken) यह अक्सर लोगों को बहुत पसंद होता है कि आपको पता है चिकन (Chicken) को बार-बार गर्म करने गर्म किया जाए तो उसके प्रोटीन (Protein) में क्या-क्या बदलाव आते हैं दोस्तों जब हम चिकन को पहली बार पकाते हैं तो प्रोटीन (Proteins) स्पेसिफिक स्ट्रक्चर (Specific Structure) में होते हैं लेकिन जब इसको बार-बार गर्म किया जाता है तो इसका स्ट्रक्चर चेंज (Structure Change) हो जाता है साइंटिफिक स्टडीज (Scientific Studies) के अनुसार जब चिकन (Chicken)को बार-बार गर्म किया जाता है तो इसमें मौजूद प्रोटीन डिग्रेड हो जाते हैं जो पचाने में मुश्किल हो सकते हैं इससे फूड पोइज़निंग (Food Poisoning)भी हो सकती है।

5. अंडा (Egg)

अंडे को उबालकर या पकाकर (Boiled or Cooked) खाया जाता है। अंडे में प्रोटीन (Protein) पाया जाता है। हम आपको बता दे की अंडे को दोबारा ना उबाले और गरम भी ना करें। क्योंकि अंडे को बार -बार गर्म करने से इनमे मौजूद प्रोटीन्स (Protein) की मात्रा बनी नहीं रहती और कम हो जाती है। इसलिए एग (Egg) री-हिट (Re-heat) करने की बजाय इतना ही बनाए जितना आप एक बार में खा सके।

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6. मशरूम (Mushroom )

मशरूम (Mushroom) एक प्रकृति (Nature) की देन है, जो की स्वाद (Taste) और स्वास्थ्य (Health) में दोनों रिच (Rich) होते है। मशरूम (Mushroom) में प्रोटीन (Protein) अधिक मात्रा में पाया जाता है। जब हम मशरूम बनाते है तो यह बहुत ही टेस्टी होता है, जब हम मशरूम को पकाते है तो वो अपना एक यूनिक फ्लेवर (Unique Flavor) और एक अपना यूनिक टेक्सचर (Unique Texture) देते है। लेकिन इसे वापस से री-हिट (re-heat) करते है। तो उनकी डेलिकेट नेचर (Delicate Nature) इन्हे दुबारा गर्म करने (reheating)के लिए सूटेबल नहीं बनाती, जब हम मशरुम को पकाते है, तो वो अपना एक यूनिक फ्लेवर और अपना एक यूनिक टेक्स्चर देते है, पर जब हम इन्हे दुबारा गर्म करते है, तो इनके डेलिकेट नेचर की वजह से यह जो चीज़े होती है यह डीग्रेड होने लगती है और इनकी वजह से पाचन संबंधी समस्या (Digestive Issues) होने लगते है।

साइंटिफिक स्टडीज ने भी यह बताया है की रहीटिंग (Reheating) की वजह से मशरुम में मौजूद प्रोटीन्स और एन्ज़इम्स डीग्रेड होते है, और इस डिग्रडेशन की वजह से पाचन सम्बन्धी समस्या (Digestive Issues) पैदा होती है, और कभी कभी इसकी वजह से पेट में दर्द की शिकायत भी हो सकती है, उल्टी भी आ सकती है। मशरुम को फ्रेश बनाकर उसी टाइम खा लेना चाहिए। अगर इसी री-हिट (Re-heat) करना ही है, तो इसे बहुत कम तापमान पर बहुत काम समय के लिए गर्म करें।

7. कुकिंग ऑयल (Cooking Oil )

कुकिंग ऑयल (Cooking Oil) भी हमारे सभी के किचन (Kitchens) का एक पार्ट है, लेकिन क्या आप जानते हैं कुकिंग ऑयल (Cooking oil) को बार-बार गर्म करने से इनमें ट्रांस फैट्स (Trans Fats) का लेवल बढ़ सकता है, जब हम एक ही तेल को बार-बार गर्म करने लगते हैं फ्राइंग (frying) करने के लिए तो उसमें केमिकल चेंज (Chemical Changes) होने लगते हैं, और यह चेंज मॉलेक्युलर स्ट्रक्चर (Molecular structure) को बदल देते है, और इसकी वजह से ट्रांसफैट (Transfat) की मात्रा तेल के अंदर बढ़ जाती है, वैसे अगर आप ट्रांसफैट (Transfat)के बारे में नहीं जानते हैं, तो हम आपको बता दे हैं यह सबसे खतरनाक टाइप के सबसे बुरे टाइप के फैट्स (Fats) होते हैं जो की नसों में जाकर चिपक जाते हैं और ब्लॉकेज (blockage) पैदा करने में उनकी जो हिस्सेदारी है वह सबसे ज्यादा होती है।

आपने समोसे या पकोड़े बनाने के लिए तेल गर्म किया और सोच है कि तेल बच गया है उसे दोबारा गर्म करके उसे कर लेंगे तलने के लिए लेकिन यह छोटा सा डिसीजन (Decision) आपके लिए और आपकी फैमिली की हार्ट हेल्थ (Heart Health) को रिस्क (Risk) में डाल सकता है। इसलिए इस तरह के प्रयास (Practices) से बचे इसका बेहतर समाधान (Better Solution) है, कि एक बार में लिमिटेड कुकिंग ऑयल आवश्यकता अनुसार ले और इसको री -यूज़ (Re-use) करने से बचे ।

8. चाय (Tea)

चाय (Tea) हमारे देश की बहुत ही पसंदीदा ड्रिंक (Drink) है, सुबह हो या शाम एक कप चाय आपको चाहिए ही चाहिए लेकिन जब हम चाय को बार-बार गर्म करते हैं, तो चाय में मौजूद टैनिन्स (Tannins) की संख्या बढ़ने लगती है जिससे की गैस (Gas), एसिडिटी (Acidity), नींद ना आना (Insomnia) घबराहट होना (Nervousness) और कब्ज (constipation) जैसी समस्या पैदा हो सकती है। आयुर्वेदिक के अनुसार (According to Ayurvedic) देखे तो री -हीटेड (Re-heated) चाय अपनी प्राण शक्ति को खो देती है, और इसी वजह से फ्रेश (Fresh) चाय से जो आपको एनर्जी (Energy) मिलती है वो री-हीटेड (Re-heated) चाय से नहीं मिल पाती है। इसका जो असली मज़ा है वो गर्म -गर्म ताज़ी चाय में ही है। इसलिए चाय को दुबारा गर्म करने से बचना चाहिए और हमें ठंडी चाय नहीं पीनी चाहिए। यह आपके स्वास्थय के लिए सही नहीं है।

आशा करता हुए यह जानकारी आपके लिए लाभप्रद रहेगी। अगर आपको यह जानकारी पसंद आयी है तो इस जानकारी को अपने मित्रो से शेयर करें जिससे वो भी बार-बार खाने को गरम करने से होने वाले नुकसानों से बच सके।

लेखक : डॉ सुरेंद्र कुमार शर्मा (आयुर्वेदिक चिकित्सक)

By KOUSHAL KHANDAL

I am a content writer with almost 10 years of experience. I have been associated with Dr. Anil Kumar Sharma & Dr. Surendra Kumar Sharma for the last 6 years. Due to the family legacy and interest in Ayurveda, I started writing content based on Ayurveda under the guidance and proofreading of both doctors.

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