Jyada Namak Khane Ke Nukshan

Jyada Namak Khane Ke Nukshan: दोस्तों, जैसा की हम सब जानते है कि हमारी बॉडी के बहुत सारे महत्वपूर्ण कार्यो के लिए नमक का सेवन बहुत जरुरी होता है। यह हमारे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने का कार्य करता है। सोडियम जो की नमक का एक महत्वपूर्ण घटक है। यह सोडियम हमारे शरीर में फ्लूड (तरल पदार्थ) के स्तर संतुलित बनाये रखता है। इसकी मात्रा अधिक या कम होना दोनों ही स्थिति हमारे शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है। हम इस लेख में देखेंगे कि नमक का ज्यादा सेवन करने से कौन-कौन सी परेशानियाँ हो सकती है, और ज्यादा नमक खाने के नुकसान (Jyada Namak Khane Ke Nukshan) से कैसे बचा जा सकता है।

नमक दो तत्त्व (Elements) से मिलकर बनता है, सोडियम (Na) और क्लोराइड (Cl)। जब हम नमक खाते है तो यह हमारी बॉडी के अंदर इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को बनाये रखते है। यह हमारी बॉडी के अंदर हाइड्रेशन को बनाये रखता है। हमारे नर्वस सिस्टम (Nervous System) को भी सपोर्ट करता है। जी हाँ यही नमक है जिसे आप अपने टेस्ट बड्स (Taste Buds) को संतुष्ट करने के लिए खाते है। यह असल में ऐसा सुपरहीरो है, जो अंदर जाकर भी बहुत सारे जरुरी कामो को अंजाम देता है।

ज्यादा नमक खाने के नुकसान – Jyada Namak Khane Ke Nukshan

आयुर्वेद यह मानता है, “अति सर्वत्र वर्जयते” इसलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन शरीर के लिए हानिकारक होता है। शरीर को बहुत सारे नुकसान पहुँचा सकता है, और बहुत सी गंभीर समस्याओ का कारण भी बन सकता है।

ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना (Increased Blood Pressure)

सबसे पहला ज्यादा नमक खाने का नुकसान (Jyada Namak Khane Ke Nukshan) जो यह हमारी सेहत को पहुँचाता है, वह है ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना। दोस्तों हाई ब्लड प्रेशर का सीधा ताल्लुक ज्यादा मात्रा में नमक खाने से होता है। आप जितना ज्यादा नमक खाते है, उतना ही आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। जिन लोगो का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है उन्हें सलाह दी जाती है कि वह लोग भोजन में नमक की मात्रा कम कर दे। केवल पका हुआ नमक ही खाये। खाने में ऊपर से नमक ना डालें। जबकि जिन लोगो का ब्लड प्रेशर कम रहता है उनसे कहा जाता है कि जब भी उनका ब्लड प्रेशर कम हो तो वे पानी में नमक का घोल बनाके पीयें।

कल्पना कीजिये की हमारी जो खून की नसे (Blood Vessels) है, वो एक शांत नदी की तरह है। जिसमे पानी बहुत ही आराम-आराम से बड़े सुकून के साथ बह रहा है।  लेकिन अगर इसी नदी में जो कि बड़ी शांति से बह रही है। इसमें कोई तूफ़ान आ जाए तो यही पानी दोस्तों तूफ़ान भी मचा सकता है। हम जो अधिक मात्रा में नमक का सेवन करते है। यह नमक हमारे शरीर में ऐसे ही एक तूफ़ान की तरह काम करता है। जिससे हमारा ब्लड उछाले मारने लगता है, और जो हमारा हार्ट है वो ज्यादा फोर्स से पंप करने लगता है। जिससे हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर और अधिक मात्रा में नमक के बीच में सीधा कनेक्शन (Direct Connection Between High Blood Pressure and Excess Salt)

जनरल ऑफ़ अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ कार्डियोलॉजी (General of American College of Cardiology) में भी इस बात का जिक्र किया है कि हाई ब्लड प्रेशर और अधिक मात्रा में नमक का सेवन के बीच में सीधा कनेक्शन होता है, क्योंकि जब हम ज्यादा नमक खाते है, तो इससे हमारे शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है। सोडियम हमारे शरीर में वाटर रिटेंशन (पानी को रोकने का काम) करता है, जो हमारे ब्लड के वॉल्यूम को बढ़ा देता है, जिसकी वजह से हमारा हार्ट ज्यादा फाॅर्स से पंप भी करता है, और इस ब्लड वॉल्यूम के बढ़ने से भी हमारा ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इसलिए अगर आप ज्यादा नमक खाते है तो बहुत ज्यादा रिस्क आपके अंदर ब्लड प्रेशर के बढ़ने की बढ़ जाती है।

दिल की बिमारियों (Heart Disease) का खतरा बढ़ जाता है (The Risk of Heart Diseases Increases.)

हाई ब्लड प्रेशर के साथ ही ज्यादा नमक खाने से दिल की बीमारियाँ होने का खतरा भी बढ़ता है, जब किसी इंसान का ब्लड प्रेशर बढ़ता है तो इसका सीधा-सीधा असर उसके दिल के ऊपर भी पड़ता है, क्योंकि जब ब्लड प्रेशर बढ़ता है तो हार्ट को ज्यादा प्रेशर से काम करना पड़ता है, और हार्ट को ज्यादा फाॅर्स से पंप करना पड़ता है। और इस वजह से हार्ट के ऊपर स्ट्रेस बढ़ता है। वह जल्दी थकने लगता है। आख़िरकार इसकी वजह से अलग अलग तरह की दिल की बीमारियां किसी इंसान के अंदर पैदा होने लगती है।

हाई ब्लड प्रेशर किडनी फंक्शन को प्रभावित करता (High Blood Pressure Effects Kidney Function)

ज्यादा नमक के सेवन से तीसरा और बडा नुकसान हमारी गुर्दो (Kidneys) को उठाना पड़ता है। किडनियाँ हमारे शरीर में उन सिक्योरिटी फोर्सेज की तरह होती है, जो हर वक़्त शांति और सौहार्द बनाये बनाये रखने के लिए डटे रहते है, जैसे की हमारे देश की बी.एस.एफ और आर्मी डटी रहती है। लेकिन हमारी बॉडी में सोडियम की मात्रा बढ़ जाने से इनके भी पसीने छूटने लगते है। जैसे की बॉर्डर पर कई बार आतंकवादी हमले वगैरह हो जाते है, तो आर्मी को ज्यादा काम करना पड़ता है, और इसकी वजह से कुछ नुकसान भी उठाने पड़ते है।

वास्तव में डब्लू एच ओ (WHO) भी मानता है कि ज्यादा मात्रा में नमक के सेवन से हमारी किडनीस पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है। जिससे हमारी किडनीस की क्षमता प्रभावित होती है। ज्यादा नमक के सेवन से किडनीस बॉडी में ज्यादा वाटर को रिटेन करने लगती है, जिससे धीरे धीरे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। ब्लड प्रेशर के बढ़ने से आपको पता ही है किडनी की हेल्थ पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है। यह दोनों चीज़े आपको पता ही है एक दूसरे के साथ पूरक की तरह काम करती है। एक के साथ दूसरी आपको फ्री मिलती है। इन दोनों चीज़ो का जो कॉमन कारण है, वो है अधिक मात्रा में नमक का सेवन, इसलिए आपको नमक कम खाना चाहिए ताकि आपकी किडनीस भी सही से काम करती रहे, उन पर कोई नेगेटिव इफ़ेक्ट ना आये, और आपकी किडनीस सही से काम करती रहे।

ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) :

हमारी हड्डियों पर भी अधिक नमक के सेवन का नकारात्मक पड़ता है, यह भी काम ही लोग जानते है। जी हाँ दोस्तों ज्यादा नमक खाने से ऑस्टियोपोरोसिस भी हो सकता है, ऑस्टियोपोरोसिस यानी ऑस्थिसुषिरता, एक ऐसी कंडीशन है जिसमे हड्डियों का घनत्व कम होने लग जाता है, और यह खोखली और कमजोर होने लग जाती है, आसानी से टूट जाती है।

द अमेरिकन जर्नल ऑफ़ क्लीनिकल न्युट्रिशन (The American Journal of Clinical Nutrition) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार अधिक मात्रा में नमक के सेवन का सीधा सम्बन्ध होता है कैल्शियम लॉस के साथ जैसा की आप जानते है कैल्शियम एक मुख्य मिनरल जो हमारी हड्डियों में पाए जाने वाला मुख्य खनिज (Mineral) है। तो ज्यादा मात्रा में नमक खाने से हमारी हड्डियों से कैल्शियम निकलने लगता है और हमारी हड्डियाँ कमजोर होने लगती है।

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ज्यादा नमक खाने के नुकसान से कैसे बचे (Jyada Namak Khane Ke Nukshan Se Kaise Bache?)

  1. सबसे पहली स्टेप तो यह है की नमक के सेवन को नियंत्रित रखना चाहिए। ताकि यह सारी परेशानियां जो आपके अंदर पैदा हो सकती है, वो पैदा न हो और आप उनसे बचे रहे।
  2. कुछ ऐसी हर्बस यानी जड़ी बुटिया भी होती है, जो हाई साल्ट इन्टेक के साइड इफेक्ट्स को काउंटर करने का भी काम करती है। ऐसी ही कुछ जड़ी बुटिया है।
    • ऐसी ही हर्ब है, करिएंडर सीड़ यानी धनिये के बीज, रोजाना एक कप पानी में एक टी स्पून के बीज उबालकर पीने से आप अधिक नमक के सेवन से होने वाले साइड इफेक्ट्स को कम कर सकते है, रोक सकते है।
    • इसी तरह से एक और हर्ब है, जो नमक से होने वाले साइड इफेक्ट्स को कम कर सकती है, वो है हल्दी। दोस्तों एक ग्लास गुनगुने पानी में 3 से 4 ग्राम लगभग 3/4 टी-स्पून हल्दी पाउडर डालकर ऊपर से 1 चुटकी काली मिर्च दाल दीजिये, इस पानी को रोजाना पीने से अधिक मात्रा में किये नमक के सेवन के साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकता है।
    • अंत में गार्लिक यानी लहसुन, भी नमक के साइड इफेक्ट्स को काउंटर करने का काम करती है। रोज़ सुबह 2 से 3 कली लहसुन छीलकर उसे बारीक-बारीक काटकर इन्हे पहले 15 मिनट के लिए छोड़ दीजिये। जिससे की इन में एलिसिन (Allicin) एक्टिवेट हो जाये, और फिर इसको पानी के साथ आप खा लीजिये।

यह तीनो ही नुस्खे (Remedies) बॉडी में होने वाले नमक के साइड इफेक्ट्स को कम करती है। आप अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी नुस्खे (Remedy) का प्रयोग कर सकते है।

नमक की दैनिक अनुशंसित खुराक (Daily Recommended Dosage of Salt)

अब सबसे अहम बात यह है कि एक दिन में हमें कितने नमक का सेवन करना चाहिए, जिससे हमारी बॉडी पे कोई बुरा असर न पड़े, इसके लिए अलग अलग आर्गेनाइजेशन (Organization) अलग अलग डोज़ रेकमेन्ड (Recommend) करती है, जिसमे डब्ल्यू एच ओ (WHO) द्वारा 5 ग्राम रोज़ की अनुशंसा (Recommend) किया गया है, और अन्य ओर्गनइजेशंस (Organizations) द्वारा 5 से 6 ग्राम तक सेवन की अनुशंसा (Recommendation) की गयी है, यह नमक के सेवन की अधिकतम मात्रा है, मोटे तौर पर औसत देखते है तो अधिकतम दिन में 5.5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो दोस्तों यह थी ज्यादा नमक खाने के नुकसान (Jyada Namak Khane Ke Nukshan) की जानकारी और इनसे बचने के नुस्खों की जानकारी। आशा करता हूँ यह जानकारी आपके लिए लाभदायक रहेगी।

आशा करता हूँ, यह जानकारी आपको पसंद आएगी और आपके लिए लाभदायक रहेगी।

लेखक : डॉ सुरेंद्र कुमार शर्मा (आयुर्वेदिक चिकित्सक)

By KOUSHAL KHANDAL

I am a content writer with almost 10 years of experience. I have been associated with Dr. Anil Kumar Sharma & Dr. Surendra Kumar Sharma for the last 6 years. Due to the family legacy and interest in Ayurveda, I started writing content based on Ayurveda under the guidance and proofreading of both doctors.

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