Ayurvedic Medicine For Bipolar Disorder

बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) मूलतः एक मानसिक बीमारी (Mental illness) है या हम इसे एक प्रकार का मूड डिसऑर्डर (Mood Disorder) की समस्या भी मान सकते है , जिसमे एक व्यक्ति का मूड, एनर्जी लेवल और उनके रोजमर्रा की कार्य करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है या उसमे बदलाव देखे जाते है। बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रसित व्यक्ति का एनर्जी लेवल बहुत ज्यादा या बहुत कम हो सकता है, ऐसे में व्यक्ति बहुत ज्यादा खुश या उदास रहता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Health Survey) के अनुसार हर 150 में से 1 व्यक्ति इस रोग से ग्रसित होता है, और आश्चर्य की बात यह है की इनमे से 70% लोगो को इलाज़ नहीं मिल पाता क्यूंकि लोगो में जागरूकता की बहुत कमी है। बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) में जो लक्षण पाये है मरीज़ को उसको पहचान पाना बहुत मुश्किल होता है साथ ही परिवारों में भी जागरूकता की कमी के कारण लोगो को इसके बारे में पता नहीं चल पाता इसके कारण लोग इलाज़ से वंचित रह जातें है। आज हम आपको इस आर्टिकल में Ayurvedic Medicine For Bipolar Disorder के बारे में जानकारी देंगे।

आज समाज में ऐसे मानसिक रोगो (Mental illnesses) के प्रति जागरूकता की बहुत आवशयकता है, सही समय पे रोग की पहचान, विशेषज्ञ से परामर्श और उचित इलाज़ रोगी के जीवन को बेहतर बना सकता है, और उसे एक सामान्य जीवन जीने में मदद कर सकता है। हमारे देश में मानसिक रोगो की स्वीकार्यता बहुत कम है जिसके कारण इन रोगियों समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता और इनकी स्थिति समय के साथ बिगड़ती जाती है, जबकि मानसिक रोग भी अन्य रोगों के सामान की रोग है जिसका इलाज़ संभव है।

बाइपोलर डिसऑर्डर क्या है ? (What is Bipolar Disorder ?)

यह एक जटिल मानसिक रोग है, इस रोग के कारण अनुवांशिक , जीवन में हुयी कुछ घटनाएं, लम्बे वक़्त तक तनाव की स्थिति, दिमाग के कुछ हिस्सों की संरचना का सामान्य ना होना, जो इस रोग से पीड़ित लोगो में पाए जातें है। इस रोग से पीड़ित रोगियों के स्तिथि द्विध्रुवी होती है, जिसमे एक स्थिति अति उत्साह की रहती है और दूसरी स्थिति निराशा की रहती है, रोगी इन द्विध्रुवी स्थितियों के बीच झूलता रहता है, और एक सामान्य जीवन जीने में अक्षम हो जाते है। वह कभी अति उत्साह वाले दौर से गुजरता है और कभी निराशा वाले दौर से गुजरता है रोगी इन द्विध्रुवी स्थितियों के बीच झूलता रहता है। उत्साह के समय किये गए कार्यो और निर्णयों के लिए निराशा या उदासी वाले दौर में वह आत्मग्लानि जैसे स्थिति भी महसूस करता है।

एलोपैथी भी अभी तक इस रोग के मूल कारणों का पता नहीं लगा पायी है, लेकिन यहाँ तक जरूर पहुंची है की यह दिमाग में होने वाले केमिकल के असंतुलन के कारण होने वाला एक रोग है। इस रोग में दिमाग में पाएं जाने वाले केमिकल जैसे डोपामाइन, सेरोटोनिन, नोराड्रेनालिन आदि में असंतुलन पाया जाता है। इसके साथ हिप्पोकैम्पस, प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स, ग्रे मैटर आदि हिस्सों का प्रभावित होना अथवा बनावट का सामान्य ना होना पाया गया है। आयुर्वेदा उपचार पद्दति हमेशा लक्षणों के साथ रोग को जड़ से ठीक करने पर केंद्रित रही है। ऊपर दिए गए कारणों के अतरिक्त आयुर्वेद ऐसे जटिल रोगो का कारण पूर्व जन्म के कर्म संस्कारो को भी मानता है, पूर्व जन्म के कर्म संस्कार के कारण भी व्यक्ति ऐसे रोगो की गिरफ्त में आ जाता है।

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मैंने अपनी सेवाओं का समय राजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाको में राजकीय सेवा में गुजारा और मैंने लगभग 35 वर्ष राजकीय सेवा में आयुर्वेदिक चिकित्सक के तौर पे कार्य किया इस दौरान मैंने सेकड़ो ऐसे रोगीयों का उपचार किया ऐसे रोगियों का उपचार करने में दो बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा एक तो रोग की जटिलता और दूसरा समाज में ऐसे रोगो के प्रति जागरूकता ना होना दो महत्वपूर्ण कारण रहे। इन रोगो के उपचार के लिए मैंने चरक, अष्टांगहृदय आदि आयुर्वेदिक ग्रंथो का गहन अध्ययन किया और ऐसे रोगियों का उपचार आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान और प्राकृतिक जीवनशैली के द्वारा उपचार करने का प्रयास किया और इस प्रयास के परिणाम बहुत अच्छे रहे। मैं किसी भी उपचार पद्दति का विरोध नही करता पर मैंने बहुत से ऐसे रोगियों का उपचार भी किया है जिनका परिवार बड़े शहरों के बड़े डॉक्टरों से इलाज के बाद भी बेहतर नतीजे नहीं आने से निराश हो चुका था।

मैं यह लेख अपने द्वारा किये गए उपचारो के अनुभव के आधार पर लिख रहा हूँ।

 बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of Bipolar Disorder)

  1. ऐसे रोगी कभी अति उत्साह की स्थिति महसूस करते है, जिसे Mania कहते है। इसमें रोगी अपने को कुछ अद्धभूत क्षमताओं वाला मानने लगते है, और बड़े बड़े प्लान बनाने लगते है। जैसे : वह एक बड़ा व्यापार स्थापित कर सकते है और वह अपने ख्यालो में बड़े व्यापार की रूप रेखा बना लेता है। कभी बड़े निवेश कर देते है जिसके कारण उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है यह सब वह अति उत्साह में करते है। कुछ लोगो में बिना सोचे समझे दान देने की या लोगो की मदद करने की प्रवर्ती भी पायी गयी है जिसके कारण उनको बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है वह खुद को और खुद के परिवार को समस्या में डाल देते है।
  2. इस बीमारी में जब व्यक्ति दूसरे ध्रुव यानी उदासी पर होता है, ऐसी स्थिति बहुत गंभीर होती है, ऐसे में व्यक्ति बहुत गुमसुम रहता है। उसके मन में अपराधबोध जैसी स्थितियाँ बन जाती है, उसकी किसी भी कार्य में रूचि नहीं रहती है वह या तो चुप चाप रहता है या बिना बात बहुत अधिक बोलने लगता है। वह रोजमर्रा के कार्य जैसे नहाना, दाढ़ी बनाना आदि भी समय पर नहीं कर पता। वह अपने ख्यालो में खोया रहता है। वह हर वक़्त उस बात में खोया रहता है जिसने उसकी उदासी वाली स्थिति को ट्रिगर किया है, उस स्थिति के कारण उसके मन में एक डर बना रहता है।
  3. ऐसे व्यक्तियों में वहमी होने की समस्या भी पायी जाती है।
  4. किशोरावस्था में इस रोग के लक्षण दिखने लगते है, किशोरावस्था में रोगियों में सेक्स उत्तेजक विचार अधिक आने की समस्या भी देखी गयी है, पर ऐसे स्थिति को वह आपने परिवारजनो और मित्रो से भी शेयर नहीं कर पाते।
  5. इन रोगियों में चिंता (Anxiety) की अधिकता भी रोग के पुराने होने के साथ-साथ पायी जाती है।
  6. ओ.सी.डी के लक्षण एक ही विचार का बार- बार आना भी ऐसे रोगियों में बढ़ जाता है।
  7. ऐसे लोगो की मानसिक क्षमता, सोचने समझने की क्षमता, सीखने या किसी कार्य में पारंगत होने की क्षमता बहुत हद तक प्रभावित होती है।
  8. इस रोग से पीड़ित लोगो का मन दुर्बल और कमजोर हो जाता है।
  9. याददाश्त बहुत प्रभावित हो जाती है।
  10. दिमाग के एक हिस्से में शून्यता आ जाती है, पैरों के तलवों में गर्मी और जलन महसूस होने लगती है।
  11. चेहरे का ओज-तेज समाप्त होने लगता है, शरीर को शिथिल पड़ जाता है।
  12. अपने जीवन को लेकर निराशा होने लगती है, आत्महत्या जैसे ख्याल भी मन में आते है।
  13. व्यक्ति सामान्य बातचीत में भी बहुत गहराई से सोच लेता है, उग्र और ऊँची आवाज़ में बात करने लग जाता है।
  14. बहुत से रोगियों में नशे की लत भी एक लक्षण देखा गया है, यह सभी में नहीं होता।

ऐसा कुछ लक्षण मैंने रोगियों में पाए और अनुसंधान कर उनका उपचार करने का प्रयास किया और इस प्रयास के परिणाम अच्छे रहे, रोगियों के जीवन स्तर में आमूलचूल परिवर्तन आया अब मेरे द्वारा उपचारित रोगी स्वस्थ और बेहतर जीवन जी रहे है, और अपने कार्य क्षेत्र में अच्छा कर रहे है।

बेहतर परिणामों के लिए रोगी और उसके परिवार में अनुशासन और इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है।

मैंने ऐसे रोगियों का इलाज तीन स्तर पर किया है, जिसमे मन, शरीर और आत्मा इन तीन स्तर पर उपचार किया इसके लिए दवाएं, जीवनशैली, और आध्यात्मिक ज्ञान तीनो मार्गो पर चलना आवश्यक है।

बाइपोलर डिसऑर्डर का आयुर्वेदिक और जीवशैली से उपचार (Ayurvedic Medicine For Bipolar Disorder)

दवाओं से बाइपोलर डिसऑर्डर का उपचार (Treatment of Bipolar Disorder with Medications)

इसमें रोग और रोगी की स्थिति रोग की जटिलता और रोग कितना पुराना है, लक्षणों की क्या तीव्रता आदि देख कर उपचार किया जाता है। शुरू के 3 से 6 माह तक दवाएं थोड़ी ज्यादा होती है फिर धीरे धीरे अगले 6 माह में उन्हें कम करने का प्रयास किया जाता है। इस रोग में बहुत सी दवाएं और दवाओं के मिश्रण से तैयार की गयी दवाओं का उपयोग किया जाता है।
मैंने मेरी प्रैक्टिस में इन दवाओं और इनके मिश्रणो का प्रयोग किया है, वह काफी कारगर साबित हुआ है।

  • गोदन्ती भस्म
  • प्रवाल, माणिक्य, मुक्ता ( पिष्टी या भस्म )
  • मृगश्रृंग या शृंग भस्म
  • अकीक पिष्टी
  • प्रभाकर वटी
  • शिलाजीत
  • पुनर्नवा मंडूर
  • जटामांसी, ब्राह्मी, वचा, शंखपुष्पी, अश्वगंधा आदि के मिश्रण से तैयार दवाये ( Mentat (सिरप या टेबलेट ), Mentat-DS (सिरप या टेबलेट), Memotone सिरप)
  • अश्वगंधारिष्ट
  • सारस्वतारिष्ट
  • स्मृति सागर रस
  • ब्रह्म रसायन
  • ब्राह्मी घृत
  • विटामिन सप्लीमेंट (Folci-D3, Nurokind – 500, Nurokind Strip, Supradyn आदि)

दवाओं के साथ-साथ सात्विक भोजन जिसमे प्रचुर मात्रा में दूध, दही, हरी सब्जियाँ, फलिया और नट्स (अख़रोट, बादाम ) खाना अत्यंत लाभदायक है।

जीवन शैली के द्वारा बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज (Treatment of Bipolar Disorder through lifestyle)

मन और मस्तिष्क को मजबूत बनाने के लिए यौगिक क्रियाएं करना बहुत लाभदायक रहता है।

  1. इनमे सबसे पहले सूर्य त्राटक करना बहुत लाभदायक है। इसे करने के लिए भोर के समय (Early Morning) सूर्योदय  के 1 घंटे में जब सूर्य लालिमा लिए होता है, तब उसकी तरफ खड़े होकर 2 से 5 मिनट तक ध्यान लगाकर देखना फिर थोड़ा अंतराल लेकर दूसरा चक्र (cycle) करना ऐसे 5 से 6 चक्र (cycle) करने से दिमाग की संरचना सही होने लगती है, मस्तिष्क के सभी न्यूरोट्रांस्मीटर्स (neurotransmitters) सही तरह से काम करने लगते है। मस्तिष्क धीरे धीरे स्वस्थ और मज़बूत होने लगता है। इसके परिणाम बहुत जल्दी आने लग जाते है, अनिद्रा (Insomnia) की समस्या भी दूर हो जाती है। स्थायी (Permanent) परिणामो के कम से कम 6 माह तक निरंतर यह क्रिया करनी है।
  2. इसके अतरिक्त आनापान ध्यान क्रिया जिसका लिंक में नीचे दे रहा हूँ। दिन में एक बार अवश्य इस क्रिया को करने का प्रयास करे, यह क्रिया भी मस्तिष्क को स्थिर और स्वस्थ बनाने में मदद करती है। आनापान क्रिया का 10 मिनट का वीडियो।आनापान क्रिया का 20 मिनट का वीडियो।आनापान क्रिया का 30 मिनट का वीडियो।10 मिनट से धीरे -धीरे समय बढ़ाकर 30 मिनट तक करने की प्रयास करे।

आध्यात्मिक ज्ञान से बाइपोलर डिसऑर्डर का उपचार (Treatment of Bipolar Disorder with Spiritual Knowledge)

मन और आत्मा को निर्मल बनाना अत्यधिक आवश्यक है, इसके लिए आध्यात्म और शुद्ध धर्म का ज्ञान होना अति आवश्यक है, जो मन को निर्मल बनाता है। मन और आत्मा को निर्मल बनाना अत्यधिक आवश्यक है, इसके लिए आध्यात्म और शुद्ध धर्म का ज्ञान होना अति आवश्यक है, जो मन को निर्मल बनाता है और मन और आत्मा की व्याधियों को खत्म कर एक स्थित प्रज्ञ व्यक्तित्व का निर्माण करता है। इसके लिए पदमभूषण आध्यात्मिक गुरु “श्री सत्यनारायण गोयनका जी” के द्वारा 10 दिवसीय विपश्यना शिविर के दौरान दिए गए उपदेश सुनना अत्यंत लाभदायक है। इसमें एक -एक घंटे के वीडियो है, जिनका लिंक नीचे दे रहा हूँ।

विपश्यना ध्यान शिविर प्रवचन।

दवाओं, जीवनशैली, और आध्यात्मिक ज्ञान से यह रोग जड़ से खत्म हो जाता है, बस जरुरत है तो अनुशासित रहने और दृढ़ इच्छाशक्ति की।

जिस प्रकार एक हिलते हुए कागज़ पर तस्वीर नहीं बनायीं जा सकती है, वैसे ही एक अस्थिर मन वाला व्यक्ति भी कोई कार्य दक्षता से नहीं  कर पाता और अपने लक्ष्य को भी प्राप्त नहीं कर पाता।

आशा करता हूँ, यह लेख बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) से पीड़ित लोगो और उनके परिवार के लिए लाभदायक सिद्ध होगा और इस रोग से मुक्ति में उनकी मदद करेगा।।

मैं आपके अच्छे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।

लेखक : डॉ अनिल कुमार शर्मा (सेवानिवृत अतरिक्त निदेशक आयुर्वेद विभाग, राजस्थान सरकार )

By SAURABH

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